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शून्य से शिखर तक: जब हाथ कुदाल पर हो और कंधे पर अकेलेपन का बोझ

21 February 2026 by सागर बुढा (Sagar Budha Vlogs) Leave a Comment

 
Nepali farmer using Khudalo in mountain field
नेपाल के पहाड़ी खेतों में पारंपरिक कुदाल से मिट्टी तैयार करते हुए।

कहते हैं कि घर दो पहियों से चलता है, लेकिन क्या हो जब एक पहिया अपनी दिशा ही बदल ले?

आज मैं ‘शून्य’ पर खड़ा हूँ। एक तरफ मेरी पुश्तैनी जमीन है, मेरा बगीचा है जिसे मैं अपने पसीने से सींचना चाहता हूँ, और दूसरी तरफ एक ऐसा खामोश संघर्ष है जो घर की चारदीवारी के भीतर रोज चलता है।

लोग कहते हैं कि पहाड़ की जिंदगी शांत होती है, लेकिन इस शांति के पीछे एक अकेलापन भी है। जब आप सुबह की पहली किरण के साथ खेत में कुदाल लेकर उतरते हैं और आपके साथ हाथ बंटाने वाला कोई न हो, तो वह कुदाल मिट्टी से ज्यादा आपके मन को खोदती है।

“मैंने सीखा है कि अगर कोई आपके पसीने की कद्र नहीं कर रहा, तो उसे कोसने के बजाय अपनी मेहनत की रफ्तार बढ़ा देना ही बेहतर है।”

मेरे इस सफर के कुछ कड़वे लेकिन सच्चे अनुभव:

  • उम्मीद का बोझ: हम अक्सर अपनों से उम्मीद लगाकर खुद को थका देते हैं। दूसरों के बदलने का इंतज़ार करने से बेहतर है खुद को मजबूत बना लेना।
  • शून्य की ताकत: जब आपके पास खोने को कुछ नहीं होता, तब आपके पास पाने को पूरा जहान होता है। शून्य अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की पहली सीढ़ी है।
  • अकेले लड़ना: किसानी सिर्फ मिट्टी का काम नहीं है, यह तपस्या है। अगर साथी का मन शहर की चकाचौंध में है और आपका मिट्टी की खुशबू में, तो रास्ता कठिन हो जाता है।

मेरा 5 महीने का बच्चा जब मुझे देखता है, तो मेरी सारी थकान मिट जाती है। शायद मैं आज अपनी पत्नी को न समझा पाऊं, शायद मैं आज इस ‘जंगल’ को ‘मंगल’ न बना पाऊं, लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा।

मैं लिख रहा हूँ ताकि मेरी खामोशी को शब्द मिल सकें। मैं लड़ रहा हूँ ताकि मेरा बेटा एक दिन अपनी जमीन पर फख्र कर सके।

सफर जारी है… शून्य से, अकेले, पर अडिग।

Filed Under: मेरा अनुभव, My Struggle, खेती किसानी, पहाड़ी बागवानी Tagged With: बागवानी का सफर, मेरा संघर्ष

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लेखक के बारे में

नमस्ते, मैं सागर। एक साधारण सा यात्री जिसे नेपाल के पहाड़ों और खेतों से लगाव है। sagarbuda.com पर मैं बस अपनी यात्राओं के अनुभव और खेती-किसानी की कुछ छोटी-मोटी बातें साझा करने की कोशिश करता हूँ और पढ़ें....

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